‘‘...संसार के सब धर्मों में इस्लाम की एक विशेषता यह भी है कि इसके
विरुद्ध जितना दुष्प्रचार हुआ किसी अन्य धर्म के विरुद्ध नहीं हुआ ।
सबसे पहले तो महाईशदूत मुहम्मद साहब की जाति कु़रैश ही ने इस्लाम का विरोध
किया और अन्य कई साधनों के साथ दुष्प्रचार और अत्याचार का साधन अपनाया।
यह भी इस्लाम की एक विशेषता ही है कि उसके विरुद्ध जितना दुष्प्रचार हुआ वह
उतना ही फैलता और उन्नति करता गया तथा यह भी प्रमाण है—इस्लाम के ईश्वरीय
सत्य-धर्म होने का। इस्लाम के विरुद्ध जितने दुष्प्रचार किए गए हैं
और किए जाते हैं उनमें सबसे उग्र यह है कि इस्लाम तलवार के ज़ोर से फैला,
यदि ऐसा ही है तो संसार में अनेक धर्मों के होते हुए इस्लाम चमत्कारी रूप
से संसार में कैसे फैल गया? इस प्रश्न या शंका का संक्षिप्त उत्तर तो यह
है कि जिस काल में इस्लाम का उदय हुआ उन धर्मों के आचरणहीन अनुयायियों ने
धर्म को भी भ्रष्ट कर दिया था। अतः मानव कल्याण हेतु ईश्वर की इच्छा द्वारा
इस्लाम सफल हुआ और संसार में फैला, इसका साक्षी इतिहास है...।’’
राजेन्द्र नारायण लाल और इस्लाम/इस्लाम एक स्वयंसिद्ध ईश्वरीय जीवन व्यवस्था/ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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7.12.12
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